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चरण कमल आपके ह्रदय में बसाती हूँ........................

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ghar-ghar alakh jagana hai,kanya bhrun bchana hai.

ghar-ghar alakh jagana hai,kanya bhrun bchana hai.

जो देखूँ इनको तो आकर्षित करते है
जो पास बैठती हूँ सम्मोहित करते है
छूने से डरती हूँ रोमांचित करते है
रहती हूँ दूर इनसे मन भ्रमर भेजती है
मनमोहक चरणों की सौरभ मंगवाती है
मन लौट नहीं पाता बरबस लौटाती हूँ
नींद नहीं आती सोने का उपक्रम रचाती हूँ
सानिध्य मिले कैसे,कुछ भी सोच न पाती हूँ
कुछ बन नहीं पड़ता,चरण कमल आपके
ह्रदय में बसाती हूँ

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

kavitakidhar के द्वारा
June 22, 2012

दीदी प्रणाम बहत अच्छी कविता बधाई


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