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तुम आज भी मेरे साथ हो..............

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तुम आज भी मेरे साथ हो समय के चक्रव्यूह से ग्रस्त होकर हम चले आये
अश्रुरित आँखों और स्मृतियों के साथ,क्या कभी भूल पायेंगें बीते कल को,उसकी यादों को
भावनाओं का पहनावा पहनकर दिखावा मैं कभी नहीं करूगीं
ना ही तुम्हें भूलने का निरर्थक प्रयास करूँगीं जो संभव नहीं
कुंठित मन के साथ ह्रदय की समस्त कामनाओं का दमन कर लूगीं
ताकि तुम निंदा से बच सको लेकिन तुमसे दूर जाने के बाद अश्रु गिरने लगे एकांत में
रोक लूगीं इन्हें तुमसे वादा नहीं कर सकती
क्योकि मेरा अतीत भविष्य बनकर आयेगा सामने जब
शेष स्मृतियाँ लिए हर पल दूर से विचारों के मंथन से
आकाश के चित्र पर छवि बार-बार बनेगी तुम्हारी
कई रूपों में एक साथ अपलक नयनों से निहारती
रहूंगी हर बार संतुष्टि को ह्रदय में लिए हमेशा
“तुम आज भी मेरे साथ हो”

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
June 18, 2012

परम आदरणीय वात्सल्य से भरी दीदी माँ श्री ऋतंभरा जी के चरणों में वंदन करते हुए आपके द्वारा लिखे गए शब्दों की भूरि भूरि प्रशंशा करता हूँ !


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